18 दिसंबर 2024 को पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन ‘अखुरथ संकष्टी चतुर्थी’ का व्रत रखा जाएगा।
इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व: Sankashti Chaturthi Virat ka Mahatva:
संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है।
इस व्रत को रखने से जीवन के समस्त विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
विशेषकर महिलाएं इस व्रत को अपनी संतान की सलामती और परिवार की खुशहाली के लिए करती हैं।
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि: Akhurath Sankashti Chaturthi ki puja vidhi:
1. स्नान और संकल्प:
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
2.भगवान गणेश की स्थापना:
घर के पूजा स्थल में भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री:
धूप, दीप, फूल, दूर्वा, मोदक या लड्डू, रोली, अक्षत आदि एकत्रित करें।
पूजा विधि:
भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उन्हें धूप-दीप दिखाएं।
फूल और दूर्वा अर्पित करें।
मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
गणेश चालीसा या गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
चंद्र दर्शन:
संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने का विशेष महत्व है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा: Sankashti Chaturthi Virat Katha:
प्राचीन काल में एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के तट पर बैठे थे।
माता पार्वती ने समय व्यतीत करने के लिए भगवान शिव से चौपड़ खेलने की इच्छा व्यक्त की।
खेल के दौरान हार-जीत का निर्णय करने के लिए उन्होंने तिनकों से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण प्रतिष्ठित की।
खेल में तीनों बार माता पार्वती विजयी हुईं, लेकिन बालक ने भगवान शिव को विजयी घोषित किया।
इससे क्रोधित होकर माता पार्वती ने बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दिया।
बालक ने क्षमा याचना की, तब माता ने उसे गणेश व्रत करने की सलाह दी।
बालक ने 21 दिनों तक गणेश व्रत किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उसे वरदान दिया और उसके सभी कष्ट दूर किए।
इस प्रकार, संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व: Akhurath Sankashti Chaturthi Ka Vishesh Mehetva:
अखुरथ’ भगवान गणेश का एक विशेष नाम है, जिसका अर्थ है ‘जिसका वाहन मूषक (चूहा) है’।
इस दिन भगवान गणेश की अखुरथ रूप में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
भक्तगण इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की उपासना करते हैं, जिससे उनके जीवन के समस्त विघ्न दूर होते हैं
और वे सुख, शांति और समृद्धि का अनुभव करते हैं।
अतः,
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की
कृपा प्राप्त करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2024: तिथि और समय: Akhurath Sankashti Chaturthi Date And Time 2024:
चतुर्थी तिथि आरंभ – 18 दिसंबर 2024 – सुबह 10:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 19 दिसंबर, 2024 – सुबह 10:02 बजे
संकष्टी दिवस पर चंद्रोदय – 18 दिसंबर 2024 – 08:26 अपराह्न
चंद्रमा को देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है,
इसलिए हमने पहले ही उन भक्तों के लिए चंद्रमा उदय का समय बता दिया है,
जो हर महीने यह व्रत रखते हैं ताकि वे उस दौरान आसानी से चंद्रमा को देख सकें और अपना उपवास तोड़ सकें।


